|
|
जबलपुर: मध्य प्रदेश सरकार एक तरफ महिलाओं को खुश करने के लिए लाड़ली बहना योजना के तहत हर महीने पैसा दे रही है. वहीं, दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की लगभग 1 लाख महिलाएं आशा और उषा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हमें, हमारे काम का ही पैसा नहीं दिया जा रहा. आशा और उषा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग की 1 दर्जन से ज्यादा योजनाओं के लिए काम करती हैं. अब आशा उषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि 17 तारीख तक उनका पैसा नहीं दिया गया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.मध्य प्रदेश में आशा और उषा कार्यकर्ताओं की संख्या 1 लाख से अधिक है. जबलपुर में ही इनकी . हर गांव में एक आशा या उषा कार्यकर्ता होती है. इस कार्यकर्ता का काम स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को निचले स्तर तक पहुंचना है. इनमें गर्भवती महिलाओं से जुड़ी योजनाएं, महिलाओं की संस्थागत डिलीवरी, बच्चों के टीके और हेल्थ मिशन के जुड़े कई कार्य करती हैं. इसके अलावा टीवी, मलेरिया और कुपोषण संबंधी कई योजनाएं इन सभी को आशा और उषा कार्यकर्ता के माध्यम से ही पूरा किया जाता है इस काम के एवज में आशा और उषा कार्यकर्ता को 4200 रुपए राज्य सरकार की ओर से और 6000 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है. इसके साथ ही अलग-अलग किस्म के काम के कुछ इंसेंटिव भी है, जिन्हें देने का प्रावधान है. जबलपुर आशा उषा संयुक्त मोर्चा की सचिव नीतू कनौजिया ने बताया "कि इंसेंटिव तो छोड़िए हमें केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाला 6000 रुपए भी नहीं दिया जा रहा है और मात्र 4200 में हमसे काम करवाया जा रहा है. 17 नवंबर से मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी यह सभी आशा उषा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आते हैं और नियम से इन्हें 5 तारीख तक तनख्वाह दे दी जानी चाहिए, लेकिन 2-2 महीने बीत जाने के बाद भी इनका हिसाब नहीं हो पा रहा है, अब आशा उषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार ने 17 नवंबर तक हमारी बात नहीं मानी तो 17 नवंबर से हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. |
जबलपुर: मध्य प्रदेश सरकार एक तरफ महिलाओं को खुश करने के लिए लाड़ली बहना योजना के तहत हर महीने पैसा दे रही है. वहीं, दूसरी तरफ मध्य प्रदेश की लगभग 1 लाख महिलाएं आशा और उषा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हमें, हमारे काम का ही पैसा नहीं दिया जा रहा. आशा और उषा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग की 1 दर्जन से ज्यादा योजनाओं के लिए काम करती हैं. अब आशा उषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि 17 तारीख तक उनका पैसा नहीं दिया गया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.मध्य प्रदेश में आशा और उषा कार्यकर्ताओं की संख्या 1 लाख से अधिक है. जबलपुर में ही इनकी . हर गांव में एक आशा या उषा कार्यकर्ता होती है. इस कार्यकर्ता का काम स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को निचले स्तर तक पहुंचना है. इनमें गर्भवती महिलाओं से जुड़ी योजनाएं, महिलाओं की संस्थागत डिलीवरी, बच्चों के टीके और हेल्थ मिशन के जुड़े कई कार्य करती हैं. इसके अलावा टीवी, मलेरिया और कुपोषण संबंधी कई योजनाएं इन सभी को आशा और उषा कार्यकर्ता के माध्यम से ही पूरा किया जाता है
इस काम के एवज में आशा और उषा कार्यकर्ता को 4200 रुपए राज्य सरकार की ओर से और 6000 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है. इसके साथ ही अलग-अलग किस्म के काम के कुछ इंसेंटिव भी है, जिन्हें देने का प्रावधान है. जबलपुर आशा उषा संयुक्त मोर्चा की सचिव नीतू कनौजिया ने बताया "कि इंसेंटिव तो छोड़िए हमें केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाला 6000 रुपए भी नहीं दिया जा रहा है और मात्र 4200 में हमसे काम करवाया जा रहा है.
17 नवंबर से मांग पूरी नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी
यह सभी आशा उषा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आते हैं और नियम से इन्हें 5 तारीख तक तनख्वाह दे दी जानी चाहिए, लेकिन 2-2 महीने बीत जाने के बाद भी इनका हिसाब नहीं हो पा रहा है, अब आशा उषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार ने 17 नवंबर तक हमारी बात नहीं मानी तो 17 नवंबर से हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे.