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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। एनडीए ने अब तक का सबसे बड़ा जनादेश हासिल करते हुए करीब 200 सीटों पर कब्ज़ा कर लिया, जबकि भाजपा अकेले दम पर 100 सीटों का आंकड़ा पार कर इतिहास रच गई। शाम 4 बजे तक के रुझानों में जेडीयू 75–80 सीटों पर आगे रही, जबकि एनडीए के छोटे दलों ने भी 15–20 सीटों का मजबूत योगदान दिया। पार्टी मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने जनता को धन्यवाद देते हुए शाम 5 बजे भव्य विजय उत्सव का ऐलान किया है। भाजपा ने पहली बार जेडीयू को पीछे छोड़ा—सबसे बड़ी पार्टी बनी इस चुनाव का सबसे अहम पल वह रहा जब भाजपा ने अपने सहयोगी जेडीयू को पीछे छोड़ते हुए ‘सबसे बड़ी पार्टी’ बनने का गौरव हासिल किया। यह पहली बार है जब बिहार में भाजपा अकेले दम पर 100 का आंकड़ा पार कर गई। यह नतीजा न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बदल रहा है, बल्कि भाजपा की राज्य में बढ़ती संगठनात्मक पकड़ का भी संकेत है। ‘महिला कार्ड’ बना गेमचेंजर — नीतीश की 10वीं पारी तय-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव का निर्णायक मोड़ वह रहा जब नीतीश कुमार ने 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते में 10–10 हजार रुपये ट्रांसफर किए।यह महिला वोट बैंक में बड़ा स्विंग लेकर आया और सीधे एनडीए को अभूतपूर्व बहुमत के रास्ते पर रख दिया।यही कारण है कि नीतीश कुमार लगातार 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं—भारतीय राजनीति में बेहद दुर्लभ उपलब्धि।कांग्रेस का हमला: “62 लाख वोट काटे, 5 लाख वोट बिना फॉर्म के जोड़े गए”नतीजों के बीच कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिग्विजय सिंह का आरोप 62 लाख वोट काटने और 20 लाख नए वोट जोड़नेमें गड़बड़ी का दावा,जिनमें से 5 लाख वोट बिना SIR फॉर्म के बढ़ने की बात कही।दिग्विजय सिंह ने कहा कि अधिकांश कटे हुए वोट गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदाय के थे “यह ज्ञानेश कुमार गुप्ता बनाम जनता का चुनाव”—पवन खेड़ा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की भूमिका को निशाने पर लेते हुए कहा:> “अभी रुझानों में लग रहा है कि बिहार की जनता पर ज्ञानेश कुमार गुप्ता भारी पड़ रहे हैं। आने वाले कुछ घंटों में स्पष्ट होगा कि जनता भारी पड़ेगी या वो।यह बयान चुनाव आयोग पर अप्रत्यक्ष हमले के रूप में देखा जा रहा है।अशोक गहलोत ने कहा — ‘यह वोट चोरी है’-गहलोत ने आरोप लगाया कि हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी सत्ता पक्ष ने धन बल और प्रशासनिक प्रभाव का दुरुपयोग किया।उन्होंने 1.35 करोड़ महिलाओं के खातों में चुनाव के दौरान पहुंचे 10 हजार रुपये को “चुनावी लाभ पहुंचाने की कार्रवाई” बताया और पूछा—चुनाव आयोग को क्या हो गया है?” अमित शाह का पलटवार—‘घुसपैठियों के हितैषियों को जनता ने जवाब दे दिया केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एनडीए की जीत को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर जन समर्थन’ बताया। उनका कहना था कि बिहार ने साफ कर दिया है कि“मतदाता सूची शुद्धिकरण अनिवार्य है, और इसके खिलाफ राजनीति की कोई जगह नहीं।”उनके अनुसार यही वजह है कि कांग्रेस इस बार आखिरी पायदान पर जा पहुंची है एग्जिट पोल से आगे बढ़कर आया जनादेश-एग्जिट पोल एनडीए को 133–160 सीटें दे रहे थे, लेकिन असली नतीजों ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए एनडीए को प्रचंड बहुमत दिलाया है। महागठबंधन 70–102 सीटों पर ही सीमित होता दिखा। निष्कर्ष:यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा का पुनर्निर्धारण है— जहां ✔ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, ✔ नीतीश कुमार की 10वीं वापसी, ✔ महिलाओं की भूमिका निर्णायक, ✔ विपक्ष के गंभीर आरोप, ✔ और सुरक्षा–घुसपैठ बनाम कल्याण राजनीति की टक्कर साफ झलकती है। |
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। एनडीए ने अब तक का सबसे बड़ा जनादेश हासिल करते हुए करीब 200 सीटों पर कब्ज़ा कर लिया, जबकि भाजपा अकेले दम पर 100 सीटों का आंकड़ा पार कर इतिहास रच गई। शाम 4 बजे तक के रुझानों में जेडीयू 75–80 सीटों पर आगे रही, जबकि एनडीए के छोटे दलों ने भी 15–20 सीटों का मजबूत योगदान दिया। पार्टी मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने जनता को धन्यवाद देते हुए शाम 5 बजे भव्य विजय उत्सव का ऐलान किया है।
भाजपा ने पहली बार जेडीयू को पीछे छोड़ा—सबसे बड़ी पार्टी बनी
इस चुनाव का सबसे अहम पल वह रहा जब भाजपा ने अपने सहयोगी जेडीयू को पीछे छोड़ते हुए ‘सबसे बड़ी पार्टी’ बनने का गौरव हासिल किया। यह पहली बार है जब बिहार में भाजपा अकेले दम पर 100 का आंकड़ा पार कर गई। यह नतीजा न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बदल रहा है, बल्कि भाजपा की राज्य में बढ़ती संगठनात्मक पकड़ का भी संकेत है।
‘महिला कार्ड’ बना गेमचेंजर — नीतीश की 10वीं पारी तय-राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव का निर्णायक मोड़ वह रहा जब नीतीश कुमार ने 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते में 10–10 हजार रुपये ट्रांसफर किए।यह महिला वोट बैंक में बड़ा स्विंग लेकर आया और सीधे एनडीए को अभूतपूर्व बहुमत के रास्ते पर रख दिया।यही कारण है कि नीतीश कुमार लगातार 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं—भारतीय राजनीति में बेहद दुर्लभ उपलब्धि।कांग्रेस का हमला: “62 लाख वोट काटे, 5 लाख वोट बिना फॉर्म के जोड़े गए”नतीजों के बीच कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
दिग्विजय सिंह का आरोप
62 लाख वोट काटने और 20 लाख नए वोट जोड़नेमें गड़बड़ी का दावा,जिनमें से 5 लाख वोट बिना SIR फॉर्म के बढ़ने की बात कही।दिग्विजय सिंह ने कहा कि अधिकांश कटे हुए वोट गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदाय के थे
“यह ज्ञानेश कुमार गुप्ता बनाम जनता का चुनाव”—पवन खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की भूमिका को निशाने पर लेते हुए कहा:> “अभी रुझानों में लग रहा है कि बिहार की जनता पर ज्ञानेश कुमार गुप्ता भारी पड़ रहे हैं। आने वाले कुछ घंटों में स्पष्ट होगा कि जनता भारी पड़ेगी या वो।यह बयान चुनाव आयोग पर अप्रत्यक्ष हमले के रूप में देखा जा रहा है।अशोक गहलोत ने कहा — ‘यह वोट चोरी है’-गहलोत ने आरोप लगाया कि हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी सत्ता पक्ष ने धन बल और प्रशासनिक प्रभाव का दुरुपयोग किया।उन्होंने 1.35 करोड़ महिलाओं के खातों में चुनाव के दौरान पहुंचे 10 हजार रुपये को “चुनावी लाभ पहुंचाने की कार्रवाई” बताया और पूछा—चुनाव आयोग को क्या हो गया है?”
अमित शाह का पलटवार—‘घुसपैठियों के हितैषियों को जनता ने जवाब दे दिया केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एनडीए की जीत को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर जन समर्थन’ बताया। उनका कहना था कि बिहार ने साफ कर दिया है कि“मतदाता सूची शुद्धिकरण अनिवार्य है, और इसके खिलाफ राजनीति की कोई जगह नहीं।”उनके अनुसार यही वजह है कि कांग्रेस इस बार आखिरी पायदान पर जा पहुंची है एग्जिट पोल से आगे बढ़कर आया जनादेश-एग्जिट पोल एनडीए को 133–160 सीटें दे रहे थे, लेकिन असली नतीजों ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए एनडीए को प्रचंड बहुमत दिलाया है।
महागठबंधन 70–102 सीटों पर ही सीमित होता दिखा।
निष्कर्ष:यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक दिशा का पुनर्निर्धारण है—
जहां
✔ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी,
✔ नीतीश कुमार की 10वीं वापसी,
✔ महिलाओं की भूमिका निर्णायक,
✔ विपक्ष के गंभीर आरोप,
✔ और सुरक्षा–घुसपैठ बनाम कल्याण राजनीति
की टक्कर साफ झलकती है।