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वॉशिंगटन: रूस ने दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल भंडार खोज लिया है। इसे आप कच्चे तेल का महासागर भी कह सकते हैं। रूस को ब्रिटिश अंटार्कटिक क्षेत्र के नीचे तेल भंडार मिला है, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत संरक्षित है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने अपने खोज के दौरान करीब 511 अरब बैरल कच्चे तेल का पता लगाया है, जो अब तक की कल्पना से भी कहीं ज्यादा कच्चा तेका भंडार है। इस खोज से साबित होता है कि रूस ने जमे हुए महाद्वीप के नीचे एक विशाल तेल भंडार खोज लिया है, जिससे यह आशंका और बढ़ गई है, कि वैश्विक शक्तियां बर्फ के नीचे छिपे तेल के इस महासागर का दोहन करने की कोशिश कर सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकारी भू-वैज्ञानिक कंपनी रोसजियो ने तेल की इस खोज को अंजाम दिया है। खोज के दौरान वेडेल सागर क्षेत्र में किए गए सर्वे में सामने आया कि यहां 511 अरब बैरल कच्चे तेल की संभावना है, जो अब तक पृथ्वी से जितना तेल निकाला जा चुका है, उससे भी ज्यादा मात्रा है। यह खोज इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि अंटार्कटिक संधि (1959) के तहत वहां किसी भी प्रकार की सैन्य या वाणिज्यिक गतिविधि, खासकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं कर सकता है। लेकिन रूस का कहना है कि यह सर्वे सिर्फ वैज्ञानिक मकसद के लिए किया गया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शोध भविष्य में तेल खनन की तैयारी का एक संकेत हो सकता है और भविष्य में महाशक्तियों के संघर्ष का नया अखाड़ा बन सकता है। |
वॉशिंगटन: रूस ने दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल भंडार खोज लिया है। इसे आप कच्चे तेल का महासागर भी कह सकते हैं। रूस को ब्रिटिश अंटार्कटिक क्षेत्र के नीचे तेल भंडार मिला है, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत संरक्षित है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने अपने खोज के दौरान करीब 511 अरब बैरल कच्चे तेल का पता लगाया है, जो अब तक की कल्पना से भी कहीं ज्यादा कच्चा तेका भंडार है। इस खोज से साबित होता है कि रूस ने जमे हुए महाद्वीप के नीचे एक विशाल तेल भंडार खोज लिया है, जिससे यह आशंका और बढ़ गई है, कि वैश्विक शक्तियां बर्फ के नीचे छिपे तेल के इस महासागर का दोहन करने की कोशिश कर सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकारी भू-वैज्ञानिक कंपनी रोसजियो ने तेल की इस खोज को अंजाम दिया है। खोज के दौरान वेडेल सागर क्षेत्र में किए गए सर्वे में सामने आया कि यहां 511 अरब बैरल कच्चे तेल की संभावना है, जो अब तक पृथ्वी से जितना तेल निकाला जा चुका है, उससे भी ज्यादा मात्रा है। यह खोज इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि अंटार्कटिक संधि (1959) के तहत वहां किसी भी प्रकार की सैन्य या वाणिज्यिक गतिविधि, खासकर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं कर सकता है। लेकिन रूस का कहना है कि यह सर्वे सिर्फ वैज्ञानिक मकसद के लिए किया गया है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शोध भविष्य में तेल खनन की तैयारी का एक संकेत हो सकता है और भविष्य में महाशक्तियों के संघर्ष का नया अखाड़ा बन सकता है।