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यद्यपि सरकारी स्कूलों की तुलना में प्राइवेट स्कूल की शिक्षा का स्टैंडर्ड भी उत्तम है तथा सभी प्रकार के संसाधन एवं क्वालिफाइड शिक्षक भी उनके पास होते हैं और प्राइवेट स्कूलों के रिजल्ट भी उत्तम कोटि के होते हैं तथा विभिन्न गतिविधियां भी शासकीय स्कूल से ज्यादा चलती है। तथापि...... |
यद्यपि सरकारी स्कूलों की तुलना में प्राइवेट स्कूल की शिक्षा का स्टैंडर्ड भी उत्तम है तथा सभी प्रकार के संसाधन एवं क्वालिफाइड शिक्षक भी उनके पास होते हैं और प्राइवेट स्कूलों के रिजल्ट भी उत्तम कोटि के होते हैं तथा विभिन्न गतिविधियां भी शासकीय स्कूल से ज्यादा चलती है। तथापि......
एक समय था जब भारत में प्राइवेट स्कूलों की संख्या नगण्य थी तथा भारत के एक/दो प्रतिशत बच्चे ही प्राइवेट स्कूलों में जाते थे, शेष 98% बच्चे सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करते थे।
अंग्रेजों के जमाने से लेकर आजादी के कई वर्षों बाद भी सरकारी स्कूलों में शैक्षिक संसाधन बहुत कम थे। यहां तक की बच्चों को बैठने के लिये टाट पट्टियां भी नहीं थी, बच्चे अपने घर से अपना आसन लेकर जाते थे। कवेलू की छतों से पानी टपकता था और बारिश के दिनों में अधिकांश "रेनी डे" की छुट्टियां मनाई जाती थी। बरसते पानी में कपड़े की थैली का बना हुआ अपना बस्ता लेकर सड़कों पर भरे हुए पानी के गड्ढों के बीच छप-छप करता हुआ बच्चा स्कूल पहुंचता था किंतु कमरों में पानी ही पानी होने की वजह से छुट्टियां कर दी जाती थी। ब्लैकबोर्ड भी खुरदुरे तथा धुंधले होते थे, जिन पर शिक्षक की लिखावट भी बच्चों को दिखाई नहीं देती थी।
लेखन सामग्री का अभाव था, अनेक बच्चे किताबें कॉपियां खरीदने में सक्षम नहीं थे। माता-पिता इतने गरीब थे कि घर चलाने के चक्कर में उन्हें बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की फुर्सत ही नहीं थी अनेकों को तो यह भी पता नहीं रहता था कि उनके बच्चे कौन सी कक्षा में पढ़ रहे हैं?
उक्त स्थिति के बाद भी भारत के सरकारी स्कूलों में बड़े-बड़े विद्वान, वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारियों सहित राजनीतिक क्षेत्र में अच्छे नेताओं का निर्माण हुआ, क्योंकि उस समय स्कूल में बसें नहीं थी। इसलिए बच्चा पैदल कई कई किलोमीटर तक पैदल जाकर स्कूल जॉइन करता था। बीच में नदी नालों को भी पर करता था, पेड़ों पर चढ़ना स्कूल से तड़ी मार करके मित्रों के साथ खेलता था। नदी नालों तालाब और कुआं में तैरता था और जो बदमाश तथा उद्दंड बच्चों थे उनसे वह स्वयं संघर्ष करता था, मारता भी था और मार भी खाता था। किंतु अब प्राइवेट स्कूलों में अधिकांश बच्चे बस और अन्य वाहनों से स्कूल जाते हैं तथा उसी में बैठकर अपने घर आ जाते हैं उसके बाद या तो कोचिंग ट्यूशन या फिर ऐसे अनेक माता पिता है जो यह सोचते हैं कि मेरा बच्चा बिगड़ ना जाए इसलिए कॉलोनी और मोहल्ले के बच्चों के साथ उन्हें खेलने भी नहीं देते है तो बच्चों की संघर्ष क्षमता और उनका उनका सर्वांगीण विकास बाधित हो जाता है तथा वह संसार के उतार चढ़ाव के बीच समायोजन नहीं कर पाते, धैर्य खो देते हैं, निराशा या डिप्रेशन में चले जाते हैं और कभी-कभी आत्महत्या का सहारा भी ले लेते हैं।
बचपन से ही माता-पिता उसके दिमाग में डॉक्टर, इंजीनियर IAS या आईआईटियन और न जाने क्या-क्या बनने के सपने भर देते हैं तथा उसकी योग्यता का अनुमान लगाये बगैर उससे बड़ी अपेक्षाएं करते हैं यदि उन अपेक्षाओं के परिणाम स्वरूप यदि कुछ बच्चे उच्च स्थान पर पहुंच भी जाते हैं तो फिर भी समाज के प्रति उनकी संवेदना मरी हुई होती है।
एक अधिकार संपन्न अधिकारी होने के बाद भी उसके मन में समाज के प्रति ममत्व, गरीबों के प्रति दया का भाव न्यूनतम रहता है। वह लालची एवं सिद्धांत विहीन जीवन जीते हैं और किसी के कल्याण करने का विचार भी उनके मन में नहीं आता क्योंकि उन्होंने विद्यार्थी जीवन में सामाजिक जीवन जिया ही नहीं इसलिए वह किसी भी क्षेत्र में प्रैक्टिकल नहीं होते।
लालची माता-पिता की संतान भी उनसे बढ़कर लालची होती है और उनकी लालच इस चरम पर पहुंच जाती है कि वह अपने माता-पिता और परिवार से भी दूरियां बना लेते हैं।
आप सोचो ऐसी शिक्षा क्या काम की, ऐसा धन क्या काम का, ऐसी अफसरी यह क्या काम की, ऐसी सफलता क्या काम है जो हमारे परिवार समाज और देश के काम ना आए उससे तो वही लोग अच्छे हैं जो गरीबी की जिंदगी जी कर शिक्षा प्राप्त करते है।
आप जब भी देखेंगे मोहल्ले या कॉलोनी अथवा समाज कोई संकट होता है तो सरकारी स्कूल में पढ़े हुए, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले, गरीबी से जीवन काटने वाले मौके पर सबसे ज्यादा आगे होते हैं जबकि तथाकथित क्वालिफाइड लोग अपने एयर कंडीशन रूम से बाहर तक नहीं निकलते।
इसलिए सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल हो, जब तक शिक्षा, समाज के सरोकारों से नहीं जुड़ती परिवार के सरोकारों से नहीं जुड़ती तब तक उसका कोई औचित्य नहीं है इस दिशा में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को अवश्य ध्यान देना चाहिए।
रमेशचन्द्र चन्द्रे