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मंदसौर। उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर के तत्वावधान में ग्राम मोहम्मदपुरा (मैनपुरिया) के पंचायत भवन में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे दिन विभिन्न बौद्धिक एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन हुआ। 17 मार्च से शुरू हुआ यह शिविर 23 मार्च तक संचालित किया जाएगा, जिसकी मुख्य थीम ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल जीवन’ रखी गई है। शिविर के तीसरे दिन ‘भारतीय शिक्षा प्रणाली- फायदे और नुकसान‘ विषय पर एक विचारोत्तेजक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच शिक्षा की वर्तमान स्थिति, उसकी खूबियों और चुनौतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना था।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. रोशन गलानी के संबोधन से हुई, जिन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा न केवल व्यक्ति के व्यक्तिगत भविष्य को गढ़ती है, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला भी रखती है। चर्चा के दौरान भारतीय शिक्षा प्रणाली के सकारात्मक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वर्तमान ढांचा छात्रों को विभिन्न विषयों और धाराओं के विस्तृत विकल्प देता है, जिससे वे अपनी रुचि के अनुसार करियर चुन सकते हैं। साथ ही, सरकारी योजनाओं के माध्यम से विशेषकर ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की पहुँच सुलभ हुई है।सत्र के दौरान शिक्षा प्रणाली की कमियों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि हमारी प्रणाली अक्सर व्यावहारिक ज्ञान और आलोचनात्मक सोच के बजाय रटंत पद्धति पर अधिक केंद्रित रहती है। इसके अलावा, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता का बढ़ता अंतर और आधुनिक संसाधनों की सीमित उपलब्धता को एक बड़ी चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया।यह संपूर्ण आयोजन उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. दीपक हरि रानडे के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रदीप तुरुकमाने एवं सह समन्वयक डॉ. प्रियंवदा सोनकर ने सभी स्वयंसेवकों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी रचनात्मक चर्चाएं ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनती हैं। इस ज्ञानवर्धक सत्र ने उपस्थित जनसमूह को शिक्षा के माध्यम से बेहतर भविष्य निर्माण की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।
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मंदसौर। उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर के तत्वावधान में ग्राम मोहम्मदपुरा (मैनपुरिया) के पंचायत भवन में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सात दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे दिन विभिन्न बौद्धिक एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन हुआ। 17 मार्च से शुरू हुआ यह शिविर 23 मार्च तक संचालित किया जाएगा, जिसकी मुख्य थीम ‘प्राकृतिक खेती खुशहाल जीवन’ रखी गई है। शिविर के तीसरे दिन ‘भारतीय शिक्षा प्रणाली- फायदे और नुकसान‘ विषय पर एक विचारोत्तेजक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच शिक्षा की वर्तमान स्थिति, उसकी खूबियों और चुनौतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना था।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. रोशन गलानी के संबोधन से हुई, जिन्होंने शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा न केवल व्यक्ति के व्यक्तिगत भविष्य को गढ़ती है, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास की आधारशिला भी रखती है। चर्चा के दौरान भारतीय शिक्षा प्रणाली के सकारात्मक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वर्तमान ढांचा छात्रों को विभिन्न विषयों और धाराओं के विस्तृत विकल्प देता है, जिससे वे अपनी रुचि के अनुसार करियर चुन सकते हैं। साथ ही, सरकारी योजनाओं के माध्यम से विशेषकर ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की पहुँच सुलभ हुई है।सत्र के दौरान शिक्षा प्रणाली की कमियों पर भी गंभीर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि हमारी प्रणाली अक्सर व्यावहारिक ज्ञान और आलोचनात्मक सोच के बजाय रटंत पद्धति पर अधिक केंद्रित रहती है। इसके अलावा, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच शिक्षा की गुणवत्ता का बढ़ता अंतर और आधुनिक संसाधनों की सीमित उपलब्धता को एक बड़ी चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया।यह संपूर्ण आयोजन उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. दीपक हरि रानडे के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रदीप तुरुकमाने एवं सह समन्वयक डॉ. प्रियंवदा सोनकर ने सभी स्वयंसेवकों और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी रचनात्मक चर्चाएं ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनती हैं। इस ज्ञानवर्धक सत्र ने उपस्थित जनसमूह को शिक्षा के माध्यम से बेहतर भविष्य निर्माण की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।
प्रदीप तुरूकमाने